नीरव मोदी को बचाना चाहती थी मोदी सरकार? ब्रिटेन में गिरफ्तारी के लिए नहीं किया सहयोग

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नीरव मोदी को बचाना चाहती थी मोदी सरकार? ब्रिटेन में गिरफ्तारी के लिए नहीं किया सहयोग

नीरव मोदी को बचाना चाहती थी मोदी सरकार? ब्रिटेन में गिरफ्तारी के लिए नहीं किया सहयोग

पंजाब नेशनल बैंक फ्रॉड मामले में भगोड़ा हीरा कारोबारी नीरव मोदी पिछले सप्ताह लंदन की गलियों में घूमते नजर आया था। नीरव ने लाखों रुपये मूल्य की जैकेट पहन रखी थी। पहले क्लिन सेव रहने वाले नीरव का लुक भी बदला हुआ था। तब केंद्र सरकार ने जोर देकर कहा कि उसके खिलाफ मुकदमा चलाने और उसे प्रत्यर्पित करने के प्रयासों में भारत की ओर से कोई देरी नहीं हुई है। जब भारत सरकार के दावों की पड़ताल की गई तो कुछ और ही बात सामने आयी। एनडीटीवी की रिपोर्ट के मुताबिक, ब्रिटेन ने नीरव मोदी को गिरफ्तार करने के लिए कागजात मांगे थे, लेकिन भारत ने किसी तरह का जवाब नहीं दिया। ब्रिटेन की एक कानूनी टीम ने नीरव मोदी के खिलाफ कार्रवाई में मदद करने के लिए भारत आने की पेशकश की थी, लेकिन कथित तौर पर यहां की सरकार की ओर से किसी तरह की प्रतिक्रिया नहीं मिली।

एनडीटीवी ने सूत्रों के हवाले से बताया कि पहली बार भारत ने ब्रिटेन को जो अलर्ट भेजा था, वह म्युचुअल लीगल असिस्टेंस ट्रीटी (एमएलएटी) के तहत फरवरी 2018 में वापस आ गया था। यह उस वक्त अमल में लाया गया था जब सीबीआई ने पंजाब नेशनल बैंक से 13000 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी के मामले में नीरव मोदी और उसके परिजनों के खिलाफ पहला क्रिमिनल केस दर्ज किया था। इससे पहले, विदेश में अपराधियों को पकड़ने के लिए कानूनी सहायता ज्यादा समय लेने वाली होती थी।

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कानूनी सहायता संधि का मतलब था कि गृह मंत्रालय लंदन में भारतीय उच्चायोग को सीधे सम्मन या वारंट दे सकता है, जो बाद में इसे सेंट्रल ऑथरिटी को भेज सकता है। इस मामले में ब्रिटेन में सेंट्रल ऑथरिटी ने फैसला किया कि क्राउन अभियोजन पक्ष और एसएफओ के बीच, यह सीरीयस फ्रॉड ऑफिस (गंभीर धोखाधड़ी कार्यालय) का मामला था, जो नीरव मोदी के खिलाफ कार्रवाई करने के अनुरोध के लिए अधिक उपयुक्त था।

सीरीयस फ्रॉड ऑफिस ने मार्च तक भारत को पुष्टि किया था कि नीरव मोदी ब्रिटेन में है। उस समय भारतीय अधिकारी यह जानने में जुटे थे कि नीरव यूरोप या हांगकांग में। इसके कुछ महीने बाद ही उन्होंने पुष्टि की कि वह ब्रिटेन में हैं। धोखाधड़ी कार्यालय ने अपने वकील के साथ भारत को मदद करने के लिए एक वकील भी सौंपा। वकील का नाम बैरी स्टेनकोम्ब है, जो एक जूनियर बैरिस्टर हैं और धोखाधड़ी और मनी लॉन्ड्रिंग मामलों के अच्छे जानकार हैं।

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रिपोर्ट के अनुसार, स्टेनकोम्ब और उनकी टीम को भारत के अनुरोध पर काम करते हुए यह महसूस हुआ कि उन्हें और दस्तावेजों की जरूरत है। उस समय उन्होंने इस बाबत तीन पत्र लिखें, लेकिन उन्हें किसी तरह की प्रतिक्रिया नहीं मिली। उन्होंने संवाद भी किया कि वे साक्ष्यों को इकट्ठा करने के लिए भारत आना चाहते हैं ताकि नीरव मोदी को गिरफ्तार कर सकें। इसके बावजूद उन्हें किसी तरह का जवाब नहीं मिला।

इस बीच, नीरव मोदी ने भारत के अनुरोधों पर ब्रिटेन द्वारा कार्रवाई की आशंका में खुद के बचाव के लिए कानूनी टीम का भी गठन कर लिया। ब्रिटेन में शरण के लिए उसने कानूनी फर्म मिशकॉन से संपर्क किया और इस फर्म ने नीरव के अनुरोध पर काम करना भी शुरू कर दिया। इस कानूनी फर्म मिशकॉन को कमल रहमान नामक वकील द्वारा संचालित किया जा रहा है। वहीं, प्रत्यर्पण मामले को लेकर नीरव मोदी के लिए आनंद डोबे के नेतृत्व में एक दूसरी टीम काम कर रही थी।

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रिपोर्ट : जनसत्ता एवं एनडीटीवी

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